Manmohan Singh Coal Scam Case – 14 साल पुराने कोयला घोटाला मामले में पूर्व PM को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट मानी

Manmohan Singh Coal Scam Case

Manmohan Singh Coal Scam Case में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को बड़ी कानूनी राहत देते हुए CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के पास CBI की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने का कोई ठोस आधार नहीं था। इसके साथ ही कोयला आवंटन मामले में मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रही कार्यवाही समाप्त हो गई। यह फैसला उनके निधन के करीब डेढ़ साल बाद आया है।

Manmohan Singh Coal Scam Case क्या है?

Manmohan Singh Coal Scam Case में सुप्रीम कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ कोयला आवंटन मामले को बंद कर दिया। अदालत ने माना कि CBI की जांच में अभियोजन के पर्याप्त आधार नहीं मिले थे और ट्रायल कोर्ट द्वारा क्लोजर रिपोर्ट खारिज करने का फैसला उचित नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मनमोहन सिंह की याचिका स्वीकार कर ली। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा

  • CBI की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं थे।
  • ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन का आदेश निरस्त किया जाता है।
  • CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की जाती है।
  • मामले को मेरिट के आधार पर बंद किया जाता है।

इस फैसले के साथ पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ लंबित कानूनी कार्यवाही समाप्त हो गई।

Manmohan Singh Coal Scam Case में CBI ने क्लोजर रिपोर्ट क्यों दी थी?

CBI ने अपनी जांच के बाद अदालत में दो बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। जांच एजेंसी का निष्कर्ष था कि

  • पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले।
  • कोयला ब्लॉक आवंटन में उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का आधार स्थापित नहीं हुआ।

इसके बावजूद विशेष अदालत ने 2015 में समन जारी कर दिया था, जिसे मनमोहन सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

 

कोयला आवंटन (Coal Allocation) मामला क्या था?

यह मामला UPA सरकार के दौरान निजी और सरकारी कंपनियों को कोयला ब्लॉकों के आवंटन से जुड़ा था। आरोप थे कि

  • कोयला ब्लॉकों के आवंटन में अनियमितताएं हुईं।
  • स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिशों से अलग निर्णय लिए गए।
  • कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

इसी मामले में हिंदाल्को को कोयला ब्लॉक आवंटित किए जाने के फैसले को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री का नाम भी जांच के दायरे में आया था।

 

मनमोहन सिंह की ओर से क्या दलील दी गई थी?

पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा था कि

  • कोयला ब्लॉक आवंटन एक प्रशासनिक निर्णय था।
  • निजी कंपनी को ब्लॉक आवंटित करना कानून के खिलाफ नहीं था।
  • स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश से अलग निर्णय लेना अपने आप में अवैध नहीं माना जा सकता।

उन्होंने अदालत से यह भी आग्रह किया था कि पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाया जाए।

 

इस फैसले का क्या महत्व है?

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि

  • यह फैसला डॉ. मनमोहन सिंह के निधन (26 दिसंबर 2024) के लगभग डेढ़ वर्ष बाद आया है।
  • अदालत ने CBI की जांच रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मामले का कानूनी समापन कर दिया।
  • इससे लंबे समय से चल रहे इस विवाद का न्यायिक अंत हो गया।

हालांकि यह फैसला केवल इस विशेष मामले और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दिया गया है।

 

निष्कर्ष

Manmohan Singh Coal Scam Case में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ लंबी कानूनी प्रक्रिया का अंतिम अध्याय साबित हुआ। अदालत ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए कहा कि अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं थे। इसके साथ ही कोयला आवंटन मामले में उनके खिलाफ सभी लंबित कार्यवाही समाप्त हो गई।

 

FAQs

  1. सुप्रीम कोर्ट ने मनमोहन सिंह से जुड़े कोयला घोटाला मामले में क्या फैसला दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ कोयला आवंटन मामले को बंद कर दिया और ट्रायल कोर्ट के समन आदेश को रद्द कर दिया।

 

  1. CBI ने मनमोहन सिंह को क्लीन चिट क्यों दी?

CBI की जांच में उनके खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इसी आधार पर एजेंसी ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।

 

  1. कोयला आवंटन (Coal Allocation) मामला क्या था?

यह मामला UPA सरकार के दौरान विभिन्न कंपनियों को कोयला ब्लॉकों के आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा था।

 

  1. इस मामले में मनमोहन सिंह पर क्या आरोप लगाए गए थे?

आरोप था कि प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिशों से अलग जाकर एक कोयला ब्लॉक आवंटित किया। हालांकि CBI को उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।

 

  1. सुप्रीम कोर्ट ने CBI की रिपोर्ट क्यों स्वीकार की?

अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के पास CBI की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करने का कोई ठोस आधार नहीं था। इसलिए रिपोर्ट स्वीकार करते हुए मामला बंद कर दिया गया।