Bengal Voter List Deletions पर SC की नजर! कितने नाम हटे और कितनी Appeals लंबित? मांगा पूरा हिसाब

Bengal Voter List Deletions

पश्चिम बंगाल की Bengal Voter List Deletions को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने Election Commission से उन मामलों की पूरी जानकारी मांगी है, जिनमें Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील की गई थी। कोर्ट ने पूछा है कि कितनी अपीलों का निपटारा हो चुका है और कितने मामले अभी लंबित हैं।

Supreme Court ने Election Commission से क्या मांगा?

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने Election Commission से SIR से जुड़े अपीलीय मामलों का ब्योरा मांगा। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। मामला कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका से जुड़ा है। इसमें SIR के दौरान वोटर लिस्ट से बाहर किए गए लोगों की अपीलों का जल्द निपटारा करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अब तक निपटाई गई अपीलों और लंबित मामलों की जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

Image: The Hindu

Bengal Voter List Deletions का पूरा मामला क्या है?

West Bengal में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम चुनावी सूची से बाहर किए गए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, enumeration phase में 58 लाख से अधिक electors बाहर हुए थे। इसके बाद claims और objections के दौरान करीब 9.64 लाख Forms 6 और 6A के जरिए नाम जोड़ने के आवेदन आए, जबकि 99 हजार से अधिक Form 7 आवेदन नाम हटाने से जुड़े थे। अंतिम electoral roll में करीब 1.82 लाख नाम जोड़े गए। इसी प्रक्रिया को लेकर transparency, appeals और data disclosure पर सवाल उठाए गए हैं।

West Bengal SIR में Appeals का मुद्दा क्यों अहम है?

West Bengal SIR Voter Deletions के खिलाफ अपील सुनने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले स्वतंत्र appellate tribunals की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। इन tribunals की अध्यक्षता पूर्व हाई कोर्ट जजों को करनी थी। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के trial court judges को भी revision exercise से जुड़ी शिकायतों से निपटने के लिए तैनात करने की अनुमति दी गई थी। बाद की सुनवाई में बड़ी संख्या में अपील लंबित होने का मुद्दा सामने आया। जुलाई की एक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 33.5 लाख appeals लंबित होने की बात अदालत में रखी गई थी, हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़े अलग बताए गए हैं।

 

Supreme Court ने Citizenship को लेकर भी क्या कहा?

यहां एक अहम कानूनी अंतर समझना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वोटर लिस्ट से किसी व्यक्ति का नाम हटना अपने आप उसकी citizenship खत्म नहीं करता। अदालत ने यह भी कहा कि Election Commission नागरिकता तय करने वाली अंतिम अथॉरिटी नहीं है। इसलिए Bengal Voter Deletion Case में electoral roll से नाम हटने और नागरिकता के सवाल को अलग-अलग समझना जरूरी है।

 

25 अगस्त को फिर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने Election Commission और संबंधित पक्षों से SIR से जुड़ी अपीलों का पूरा विवरण मांगा है। अब 25 अगस्त को इस मामले के साथ West Bengal SIR से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी। Bengal Voter List Deletions का मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा संबंध मतदाताओं के चुनावी अधिकार और electoral roll की पारदर्शिता से है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि Election Commission अदालत के सामने कितनी अपीलें लंबित और कितनी निपटाई जा चुकी हैं, इसका क्या आंकड़ा रखता है।

 

निष्कर्ष

Bengal Voter List Deletions का मामला अब सिर्फ वोटर लिस्ट में नाम जुड़ने या हटने तक सीमित नहीं है। यह मतदाताओं के अधिकार, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और अपीलों के समय पर निपटारे से भी जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा Election Commission से लंबित और निपटाई गई appeals का विवरण मांगना इस पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है। अब 25 अगस्त की सुनवाई पर नजर रहेगी, जहां अदालत SIR से जुड़े मामलों की स्थिति पर आगे सुनवाई करेगी।

 

FAQs

1. सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल की वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों को लेकर क्या जानकारी मांगी है?

सुप्रीम कोर्ट ने Election Commission से Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों के खिलाफ दायर appeals का विवरण मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि कितनी appeals का निपटारा हो चुका है और कितने मामले अभी लंबित हैं।

 

2. पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से नाम क्यों हटाए गए?

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट का Special Intensive Revision यानी SIR किया गया था। इस प्रक्रिया के तहत मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन और electoral roll का पुनरीक्षण किया गया। सत्यापन के दौरान पात्रता से जुड़ी आपत्तियों और अन्य कारणों के आधार पर कुछ नाम सूची से बाहर किए गए।

 

3. West Bengal SIR क्या है?

SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची में दर्ज नामों और संबंधित जानकारियों का दोबारा सत्यापन करता है, ताकि electoral roll को अपडेट और अधिक सटीक बनाया जा सके।

 

4. सुप्रीम कोर्ट ने Election Commission से कौन-कौन से विवरण मांगे हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने SIR से जुड़े appellate tribunals में तय हो चुकी और लंबित appeals का विवरण मांगा है। अदालत यह जानना चाहती है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ कितने मामलों पर फैसला हो चुका है और कितने मामलों पर अभी सुनवाई बाकी है।

 

5. बंगाल में कितने मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए?

SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम electoral roll से बाहर हुए। हालांकि, नाम हटाए जाने, claims और objections के बाद final electoral roll में बदलाव हुए। इसलिए अलग-अलग चरणों के आंकड़ों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

 

6. जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वे अपील कैसे कर सकते हैं?

जिन मतदाताओं के नाम electoral roll से हटाए गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित appellate authority या tribunal के सामने appeal कर सकते हैं। SIR के दौरान ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष appellate tribunals की व्यवस्था की गई है।

 

7. वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद अपील की सुनवाई कौन करता है?

SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ appeals की सुनवाई के लिए विशेष appellate tribunals बनाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन tribunals की अध्यक्षता के लिए पूर्व हाई कोर्ट जजों की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था।